Sunday, June 18, 2017

अंधविश्वास एक बुरा रोग

हिंदू संस्कृति में यदि कोई व्यक्ति अपने मां बाप का नाम किसी कागज के टुकड़े पर लिखा हुआ देखता है, तो उसे उठाकर किसी ऐसी जगह रखता है ताकि उस पर पैरों में ना पड़े !

ऐसे ही भरत ने श्रीराम के खड़ाऊँ अपने सिर माथे पर लगाकर सिंहासन पर रखकर राम के ना होने पर उनके नाम से राज्य किया !

फिर क्यों जब श्रीराम के नाम से सेतु पुल के लिए श्रीराम का नाम लिखकर पत्थर तैराए गए तो उस पर सभी भालू...रीछ....बंदर....पैर रख-रखकर  लंका पहुंचे !

क्या तब उन्हें अपने श्री राम के नाम को पैरों तले रखने पर शर्म या ग्लानि नहीं हुई ? ऐसे में कहां गया उनका प्रभु श्रीराम के प्रति सम्मान और आराधना ?

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