Friday, March 31, 2017

गारेंगा की जनता सक्रिय होगी तभी विकास संभव है

*समस्या क्र.-6*

*ग्राम-पंचायत गारेंगा के संपूर्ण लोग सक्रिय होंगे तभी बचेंगे जंगल*

साथिओं आज हम आपके सामने *गारेंगा* के वनों से संबंधित पिटारा लेकर आये हैं|
तो कृपया आप इस पोस्ट को अंतिम तक पढे|

जंगल की रक्षा एवं प्रबंधन में ग्रामीण, पंचायत और सरकार-तीनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। जंगल को लेकर अगर इन तीनों स्तरों पर समझदारी और समन्वय बन जाए तो वन और वनावरण के सवाल पर एक व्यापक बदलाव हो सकता है। वन का सवाल एक बहुआयामी सवाल है और यह जलवायु एवं पर्यावरणीय संकटों से घिरे आज के समय का अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है। जंगल एक ऐसा मुद्दा है जो जल, जीवन, जीविका, कृषि, जैवविविधता, संस्कृति, स्वास्थ्य, जड़ी-बूटी एवं चिकित्सा, जलवायु आदि पहलुओं से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है। इस पर हर स्तर से एक बुनियादी समझ बनाने और एक नजरिया विकसित करने की जरूरत है।

वर्तमान संदर्भ में वनों को लेकर गांव, पंचायत और प्रशासन के स्तर पर व्यापक जागरुकता लाने की बड़ी जरूरत है। *बस्तर* जैसे पठार-पर्वत एवं पहाड़ी क्षेत्र के लिए यह और भी जरूरी हो जाता है जहां विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का बेतहासा दोहन किया जा रहा है। अंधाधुंध खनन किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर इन खनन उद्योगों से जंगलों का विनाश हो रहा है। ऐसे में *जंगल कैसे बचेगा और कौन बचायेगा?*
पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन की संकट की जिम्मेवारी कौन लेगा?
इन समस्याओं से निबटने के लिए एक तरफ तो सरकारों को नीतिगत फैसले लेने होंगे और वन पर्यावरण नीति और खनन नीति के बीच समन्वय बनाना होगा। लेकिन वनों के सरंक्षण एवं प्रबंधन में स्थानीय गांव समुदाय, पंचायत और प्रशासन बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इस दिशा में ठोस पहल हो, ठोस कार्यक्रम बने, अभियान चले और ग्राम सभा एवं पंचायतों को प्रशिक्षण मिले। कार्यक्रम को लागू करने में सरकार हर संभव मदद करे। इस काम में सरकार गैर सरकारी संगठनों एवं सामुदायिक या नागरिक संगठनों से सहयोग ले सकती है।

*ग्राम पंचायत-गारेंगा मे आयवृद्धि एवं स्वरोजगार का कार्यक्रम चलाया जाये*

लोग जंगलों की सुरक्षा या वन पालन में तभी रुचि लेंगे, जब जंगलों से उन्हें फायदा मिले और यह उनकी आय वृद्धि और स्वरोजगार का जरिया बने। केंदू पत्ता, लाह, हर्रा, बहेरा, आंवला, चिरौंजी इत्यादि वनोपज का संग्रहण एवं बिक्री ग्राम सभा द्वारा गठित सहकारिता समिति द्वारा शहर के बाजार में अच्छे दामों में की जा सकती है। पंचायत द्वारा गांव में पत्तल प्लेट बनाने के लिए मशीन लगाने के लिए वित्तीय सहयोग प्रदान किया जाना चाहिए। *महिला समूह द्वारा पत्तल प्लेट बनाकर, आंवला, जामुन, महुआ* आदि का टॉनिक बनाकर तथा मूल्य संवर्धन एवं खाद्य प्रसंस्करण कर वन खाद्य पदार्थ इत्यादि को बाजार में बेचकर आमदनी बढ़ाने का काम हो सकता है। जड़ी-बूटी आधारित परंपरागत चिकित्सा व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पंचायत स्तर पर वैद्य लोगों को प्रशिक्षित किया जा सकता है। जंगलों के आस-पास झरने या छोटे-मोटे नाले के पानी को रोकने के लिए आहार-पाइन या छोटे बांध बनाये जा सकते हैं। जंगलों के आस-पास जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है। उजड़े हुए वनभूमि पर फिर से मनरेगा या वन विभाग की योजना के तहत स्थानीय प्रजाति के पेड़ों या फलदार पेड़ों को लगाने का काम होना चाहिए।

वन एवं पर्यावरण के मुद्दे पर पंचायत या प्रखंड स्तर पर साल में कम से कम एक बार पर्यावरण एवं सांस्कृतिक मेले आयोजित होने चाहिए। इसमें नाच-गान, नाटक, गोष्ठी आदि के साथ-साथ वन पर्यावरण से जुड़े चित्रों, वन पदार्थों इत्यादि की प्रदर्शनी की जा सकती है। अगर इन सारे सुझावों को अमल करने में गांव सभा, पंचायत और प्रशासन आपस में सहयोग करते हुए समन्वित प्रयास करते हैं तो वन-पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ जीविका, जैवविविधता, जड़ी-बूटी और जंगल से जु.डे परम्परागत ज्ञान और संस्कृति की भी रक्षा होगी।

उपरोक्त लेख आप हमारे *वेबसाइट*
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पर भी पढ सकते हैं|

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Thursday, March 30, 2017

क्या गारेंगा सचमुच विकास की ओर अग्रसर हो रहा है?

*समस्या क्र.-5*

*क्या गारेंगा सच में विकास की ओर अग्रसर हो रहा है?*

साथियों आज हम इस पोस्ट के जरिये चर्चा करेंगे की *गारेंगा* सचमुच *विकास की ओर अग्रसर हो रहा है?*
अथवा *गारेंगा की जनता वाकई मे जागरूक हो रही है?*
अगर आपका जवाब है *हाँ* तो कैसे?
कुछ ऐसा ही सवाल आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं,
की ऐसे वक्त (माहौल) मे आप क्या कर सकते हैं|

1) यदि सरकारी टीचर स्कूल में पढ़ाने न आए तो आप क्या कर सकते हैं?

2) यदि डॉक्टर मरीज का इलाज न करे तो आप क्या कर सकते हैं?

3) यदि राशन दुकानदार सरेआम आपके राशन की चोरी करे तो आप क्या कर सकते हैं?

4) यदि पुलिस वाला हमारी शिकातय पर कार्रवाई न करे तो आप क्या कर सकते हैं?

5) यदि सरकारी इंजीनियर ठेकेदार से रिश्वत खाकर घटिया सड़क पास कर दे जो चंद दिनों में टूट जाए तो आप क्या कर सकते हैं?

6) आप क्या कर सकते हैं यदि सफाईकर्मी अपना काम ठीक से नहीं करते और आपका इलाका बदबू मारता है?

7) ज्यादा से ज्यादा हम बड़े अफसरों को शिकायत करते हैं लेकिन हमारी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं होती।

कुल मिलाकर, सरकारी स्कूलों में न आने वाले शिक्षकों या सफाई न करने वाले सफाईकर्मी, राशन दुकानदार, सरकारी ठेकेदार, नेताओं, पुलिसवालों या अफसरों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है।
और यही कारण है कि आजादी के 62 साल बाद भी देश में इतनी अशिक्षा और गरीबी है। लोग टीबी जैसी सामान्य बीमारी से मर रहे हैं। लोग भूखे पेट सोने को मजबूर हैं। सड़कें टूटी हुई हैं और शहर गंदगी का ढेर बन गए हैं।
कहने को तो लोकतंत्र में हम मालिक हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि इसमें हमारी भूमिका सिर्फ 5 साल में एक बार वोट देने तक ही सीमित है और अगले 5 साल हम नेताओं और असफरों के सामने गिड़गिड़ाते रहते हैं जो हमारी एक नहीं सुनते।

_तो साथिओं आशा है हमारा यह लेख को गहन अध्ययन करने के बाद आपके मन मे कोई विचार आया होगा की आप किस तरह इन सब भ्रष्टाचार के विरुद्ध ठोस कदम उठा सकते हैं|_

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हमे जरूर बतायें हमारे वाट्सएप ग्रूप *विकास चर्चा मंच गारेंगा* मे अथवा हमारे *वेबसाइट* http://surendrakannouji143.blogspot.com पर
आपके द्वारा भेजा गया बेहतरीन सुझाव को अपने *वेबसाइट* आपके नाम और फोटो के साथ प्रकाशित करेंगे|

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Wednesday, March 29, 2017

पर्यावरण की रक्षा

बिजली की बचत पर्यावरण की रक्षा
author:- abhi. |   08:21:00 |
"बिजली की बचत ही बिजली की बढ़त है|" आपने अक्सर सुना होगा| इसका अभिप्राय है यदि हम कम बिजली  की खपत करते हैं तो जो बिजली बचती है, वह हमारे बाद में काम आ जाती है| यानी कि बिजली बचाकर हम न सिर्फ उसकी मात्रा बढ़ाते हैं, बल्कि कम बिल अदा करके अपना पैसा भी बचाते हैं|
बिजली की बचत से हमें आर्थिक लाभ तो होता ही है] इससे हमारा पर्यावरण भी सुरक्षित होता है| क्योंकि की बिजली पैदा करने के लिए थर्मल प्लांटों में कोयला जलाया जाता है, जिससे जहरीली गसें हमारे वातावरण को प्रदूषित करती हैं| इतना ही नहीं थर्मल प्लांटों से निकलने वाली फ्लाई ऐश भी पर्यावरण को प्रदूषित करती है साथ ही उसका भण्डारण भी अब गंभीर समस्या बनता जा रहा है| एक अनुमान के अनुसार लगभग 50 हजार एकड़ उपजाऊ भूमि फ्लाई ऐश के नीचे दबी हुई है|
यदि हम बिजली की खपत बढ़ाते जायेंगे तो हमें अधिक कोयला जलाना होगा, परिणामस्वरूप अधिक गसें वायुमंडल में घुलेंगी और अधिक फ्लाई ऐश के ढेर लगेंगे| लेकिन यदि हम कम मात्रा में बिजली की खपत करके बिजली बचायेंगे तो कम गैस उत्सर्जन होगा और हमारा पर्यावरण शुद्ध रहेगा|
बिजली की बचत के उपाय-
बिजली की बचत के लिए हमें बहुत अधिक त्याग की जरुरत नहीं है, यदि हम अपनी आदतों में मामूली सा सुधार कर लें और छोटी छोटी बातों का ध्यान रखें तो भी बिजली की काफी बचत कर सकते हैं| जैसे-
1. परम्परागत बल्बों की बजाय एल ई डी बल्ब या सी एफ एल टयुबों का प्रयोग करें| इससे भारी मात्रा में बिजली की बचत होगी|
2. आवश्यकता न होने पर लाइट, पंखे, कूलर, AC, टी वी आदि को बंद कर दें|
3. किसी भी उपकरण को अधिक देर तक स्टैंडबाई मोड में न रखें|
4. अच्छी कंपनी के और फाइव स्टार रेटिंग वाले उपकरण ही खरीदें, जो कम बिजली की खपत करते हैं|
5. नलकूपों की मोटर केवल तभी चलायें जब खेती को वास्तव में ही पानी देने की जरुरत हो| फ्लैट रेट पर मिलने वाली बिजली का दुरुपयोग न करें|
6. बिजली के उपकरणों को काम समाप्त होते ही बंद कर दें|

उपरोक्त बातों का ध्यान रखकर हम भी बिजली की बचत और पर्यावरण की सुरक्षा कर सकते हैं| तो आज से ही इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनायें और पर्यावरणविद बनें|

Tuesday, March 28, 2017

विकास की ओर अग्रसर गारेंगा

*समस्या क्र.-2*

साथीओं आज हम इस लेख मे चर्चा करेगें की *ग्राम पंचायत-गारेंगा* मे होने वाले *पेयजल  की समस्या* से कैसे निजात पा सकते हैं......

जल ही जीवन है, ये हमेशा हम सुनते है, लेकिन मानते कितना है? क्या हम जल की रक्षा जीवन की तरह करते है? क्या हम उसे भी उतनी तब्बजो देते है, जितना किसी इन्सान की जिंदगी को? इन सवाल के जबाब सबके पास ना में ही होंगे| हम सब जानते है कि पानी के बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते| लेकिन फिर भी हम इसे फिजूल में खर्च कर देते है| हमारी प्रथ्वी के 70% भाग जल से डूबा हुआ है लेकिन 1-2 % ही इसमें से उपयोग करने लायक है| हमें जल को बहुत सहेज के रखने की जरुरत है, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब हम एक एक बूँद को तरसेंगे| पानी एक ऐसा धन है जिसे हम सहेज कर रखेंगे तभी हमारी आने वाली पीढ़ी उसे उपयोग कर पायेगी| जल है तो कल है|
जल मनुष्य की बुनियादी ज़रूरत है, इसे मानवाधिकार का दर्जा भी दिया जाता है। इसके बावजूद दुनिया भर में लगभग 100 करोड़ लोगों के पास शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होता। कहा जाता है कि सन् 2025 तक विश्व की 50 फीसदी आबादी भयंकर जल संकट झेलने को मजबूर होगी। इस संकट की जड़ क्या है? इस से मुकाबला कैसे किया जाये ताकि “सबके लिये पानी” का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके|
पानी की बर्बादी को रोकने के लिए हम अपने घर से ही शुरुआत कर सकते है| बस थोड़ीसी समझदारी और एक उठाये हुए कदम के साथ हम अपनी आने वाली पीढ़ी को यह तोहफा दे सकते है|

*पानी की बचत कैसे करें,*
*और बचाने के तरीके*

नल को खुला ना छोड़े – आप जब भी ब्रश करें, दाढ़ी बनायें, सिंक में बर्तन धोएं, तो जरूरत ना होने पर नल बंद रखे, बेकार का पानी ना बहायें| ऐसा करने से हम 6 लीटर हर एक min में पानी बचा सकते है| नहाते समय भी बाल्टी से पानी को व्यर्थ ना बहायें|
नहाने के लिए शावर की जगह बाल्टी का उपयोग करें| अगर शावर उपयोग भी करें तो छोटे वाले लगायें, जिससे पानी की कम खपत हो| शावर का उपयोग ना करके हम 40-45 लीटर पानी हर 1 min में बचा सकते है|
जहाँ कहीं भी नल लीक करे, उसे तुरंत ठीक करवाएं| नहीं तो उसके नीचे बाल्टी या कटोरा रखें और फिर उस पानी का प्रयोग करें|
लो पॉवर वाली वाशिंग मशीन उपयोग करें, इससे पानी की बचत होती है एवं बिजली भी कम लगती है| वाशिंग मशीन में रोज थोड़े थोड़े कपड़े धोने की जगह इक्कठे करके धोएं|
पोधों में पानी पाइप की जगह वाटर कैन से डालें, इससे बहुत कम पानी उपयोग होता है| पाइप से 1 घंटे में 1000 लीटर पानी तक पानी उपयोग हो जाता है, जो पूरी तरह से पानी का नुकसान है| हो सके तो कपड़े धोने वाले पानी को पोधों पर डालें|
घर में पानी का मीटर लगवाएं| आप जितना पानी उपयोग करेंगे, उसके हिसाब से उसका बिल आएगा| बिल देते समय आपको समझ आएगा कि आपने कितना बर्बाद किया है और फिर आगे से ध्यान रखेंगे|
गीजर से गर्म पानी निकालते समय उसमें पहले ठंडा पानी आता है जिसे हम फेंक देते है| ऐसा नहीं करें, ठन्डे पानी को अलग बाल्टी में भरें, फिर गर्म पानी को दूसरी में| इस पानी को आप दूसरी जगह उपयोग कर सकते है|
फ्लश में भी बहुत अधिक पानी उपयोग होता है, इसलिए ऐसा फ्लश लगवाएं जिसमें पानी का फ़ोर्स कम हो|
नालियां हमेशा साफ रखें, क्यूंकि जब ये चोक हो जाती है तो साफ करने के लिए बहुत पानी को बहाया जाता है| इसलिए पहले से ही साफ सफाई रखें|
पेड़ पोधे लगायें जिससे अच्छी बारिश हो और नदी नाले भर जाएँ|

*तो साथीओं आपको हमारा यह लेख कैसा लगा?*
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About garenga

साथिओं अंग्रेजी मे जानकारी के लिये हम क्षमाप्रार्थी हैं,
असुविधा के लिये हमे खेद है!

*Garenga*

Block / Tehsil → Bakavand

District → Bastar

State → Chhattisgarh

*About Garenga*

According to Census 2011 information the location code or village code of Garenga village is 449402. Garenga village is located in Bakavand Tehsil of Bastar district in Chhattisgarh, India. It is situated 31km away from sub-district headquarter Bakawand and 56km away from district headquarter Jagdalpur. As per 2009 stats, Garenga village is also a gram panchayat.

The total geographical area of village is 1175.52 hectares. Garenga has a total population of 1,706 peoples. There are about 374 houses in Garenga village. Jagdalpur is nearest town to Garenga which is approximately 56km away.

*Population of Garenga*

Total Population: 1,706

Male Population: 839
Female Population: 867

*connectivity*

Connectivity type:
Public Bus Service

status:
Available

connectivity type:
Private Bus Service

Status:
available

connectivity type:
Available within village

Status:
available

connectivity type:
Railway Station

Status:
Available within 10+ km distance

*Nearby Villages of Garenga*

Chhindgaon
Choknar
Dimrapal
Jaibel
Barejirakhal
Tempalkomar
Satosa
Pathri
Kolawali
Mailbeda
Chiurgaon

*Garenga - Village Overview*
Gram Panchayat : Garenga
Block / Tehsil : Bakavand
District : Bastar
State : Chhattisgarh
Pincode : 494224
Area : 1175.52 hectares
Population : 1,706
Households : 374
Nearest Town : Jagdalpur (56 KM)

(उपरोक्त लेख जनगणना 2011 के अनुसार तैयार की गई है)

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*सुरेन्द्र कुमार कन्नौजी*
*इमेल-*surendrakannouji143@gmail.com
*वेब-*surendrakannouji.blogspot.com

Enjoy life there is no god!

ठोकर मार के देखो
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1. ठोकर मारो धार्मिक गुलामी को ।

2. ठोकर मारो पूर्वजों के हत्यारों को जो देवता बने हुए हैं ।

3. ठोकर मारो उन किस्से व कहानियों को जो हमें नीच व उन्हें ऊँच बताते हैं ।

4. ठोकर मारो उन परम्पराओं को जो ऊँच नींच सिखलाती हैं ।

5. ठोकर मारो उस राम-राम या जय श्रीराम को जिसे सुबह-शाम, आते-जाते, उठते-बैठते किया करते हो ।

6. ठोकर मारो व्रत, तीज व त्योहारों को जिनके नाम पर हम लुटते हैं ।

7. ठोकर मारो पंडे और पुजारियों को जो देश और देशवासियों को लूट रहे हैं ।

8. ठोकर मारो तिलक, कलावा, लाल, काले धागे व ताबीजों को जो अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं ।

9. ठोकर मारो जी हजूरी व गांव की मजदूरी को जो हमें गुलामी में बांधती है ।

10. ठोकर मारो किस्मत, भाग्य, नसीब व ऊपर वाले की कृपा को जो हमें अपने कर्तव्य से अलग करती है ।

11. ठोकर मारो करवा चौथ, भैया दूज, रक्षा बंधन, अचौटे, पचौते, जात लगाना, जागरण करना, बकरा काटना व होली और दीवाली को ।

साथियो,
मैंने तो ठोकर मार दी । आप ये पवित्र काम कब करने जा रहे हैं ?

• हिम्मत जुटाइए अगर एक ठोकर सदियों की गुलामी से मुक्ति दिलाने में मदद करती हो तो सोचना कैसा ?

• मारो ठोकर ।

सबका मंगल हो !
🙏🙏🙏

आधुनिक युग के मनुष्य का अमानवीय दृष्टिकोण

जैसे-जैसे इंसान को किसी से मोहब्बत होने लगती है ठीक वैसे-वैसे नफरत बढ़ती जाती है। जब इंसान किसी को किसी से अपनेपन का अहसाह हो और उस...