Sunday, October 14, 2018

I'am Dharmamukt

सृष्टि निर्माता ईश्वर, जन्म, मृत्यु, पुनर्जन्म के बाद स्वर्गनरक की बातें कर के असल में धर्म लोगों की जेब काटने वाले अनोखे तरीके ही बने रहे हैं। सभी धर्मों ने बड़ी चतुरता से आम व्यक्ति को अपने फंडे पुरोहितों के थोड़े ज्ञान के सहारे एक अनूठे जाल में फांस लिया, नतीजतन पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों को जन्म से लेकर मृत्यु तक धर्म टैक्स देना पड़ रहा है। इसी टैक्स  को सुरक्षित करने के लिए धर्म के दुकानदारों ने मस्जिद, मठ, मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे बनवाएं और उनमें नियुक्त लोगों को बैठेठाले हलवा पूरी भी दिलवाई, औरतें पहुंचवाईं, ताकत दी और सुरक्षा दी।
     धर्म की दुकानदारी में लगे लोग सदियों से अपनी सत्ता की सुरक्षा के लिए आमजन को बहकाते रहे हैं और सामाजिक प्रबंध के नाम पर प्रतिबंधों की लंबी फेहरिस्त बनाते रहे हैं। धर्मों ने केवल अपने को सुरक्षित रखने के लिए 3 - 4 हजार वर्षों में अरबो लोगों की हत्याएं कराई है। ज्यादातर युद्ध जर, जोरू और जमीन के लिए नहीं बल्कि धार्मिक सत्ता के लिए हुए हैं।

–यशवंत जोगी

https://twitter.com/surendrajdp

No comments:

Post a Comment

आधुनिक युग के मनुष्य का अमानवीय दृष्टिकोण

जैसे-जैसे इंसान को किसी से मोहब्बत होने लगती है ठीक वैसे-वैसे नफरत बढ़ती जाती है। जब इंसान किसी को किसी से अपनेपन का अहसाह हो और उस...