Tuesday, October 16, 2018

इश्क़ का सफ़र....

प्यार एक अनछुआ एहसास है जिसे सिर्फ महसूस किया जा
सकता है , वो एहसास जो हमारे सीने में दिल होने के
बात की पुष्टि करता है, वो एहसास जो इस बात
की भी पुष्टि करता है की मै
भी इंसान हूँ। प्यार एक दुआ की तरह
है जो कबूल हो जाये तो वरदान और जो न कबूल हो तो
ज़िन्दगी भर पिया जाने वाला ज़हर । इंतज़ार सिर्फ
उसी का रहता है जिस पर हमारा हक़ होता है। ऐसा
नहीं होता की हमने उससे पहले कोई
खूबसूरत चेहरा न देखा हो पर फिर भी दिल न जाने
क्यों उस एक पर आकार रुक जाता है। क्यों तमन्नाओ
की उड़ान अचानक और ज्यादा बढ जाती
है? क्यों दूर दूर रहकर भी हमेसा साथ रहते है?
क्यों बिना बातो के भी होंठो पर मुस्कान आ
जाती है?
कहते है दुनिया में जिस किसी ने भी सच्चा
प्यार किया वो मिल न सके तो इस दुनिया से ऊपर भी एक
दुनिया है जहाँ वो कभी जुदा ही
नहीं हो सकते। प्रेम बहुत ही छोटा
शब्द है मगर उसका अर्थ उतना ही महान है ।
मगर आज के समय में लोगो ने प्यार की परिभाषा को बदल
दिया है , प्यार उनके लिए एक खेल मात्र होकर रह गया है।
उन्हें प्यार के महत्व को समझना चाहिए, सच्चा प्यार करने वाले
को समझना चाहिए, प्यार करने वाले के जज्बात को समझना चाहिए,
प्यार की ताकत को समझना चाहिए, और धैर्य रखकर
उन्हें सच्चा प्यार करने वाले का साथ निभाना चाहिए।
आज की तेज रफ्तार से दौड़ती
जिन्दगी में व्यक्ति जब एक-दूसरे को पीछे
धकेलते हुए आगे बढ़ने की होड़ में संवेदनाओं को खोता
चला जा रहा है। रिश्तों और एहसासों से दूर, संपन्नता में क्षणिक
सुख खोजने के प्रयास में लगा रहता है। ऐसी स्थिति में
जहां प्यार बैंक-बैलेंस और स्थायित्व देखकर किया जाता है। वहां
सच्ची मोहब्बत, पहली नजर का प्यार
और प्यार में पागलपन जैसी बातें बेमानी
लगती हैं परंतु प्रेम शाश्वत है।
प्रेम सोच-समझकर की जाने वाली
चीज नहीं है। कोई कितना भी
सोचे, यदि उसे सच्चा प्रेम हो गया तो उसके लिए दुनिया
की हर चीज गौण हो जाती
है। प्रेम की अनुभूति विलक्षण है। प्यार कब हो
जाता है, पता ही नहीं चलता। इसका
एहसास तो तब होता है, जब मन सदैव किसी का
सामीप्य चाहने लगता है। उसकी
मुस्कुराहट पर खिल उठता है। उसके दर्द से तड़पने लगता है।
उस पर सर्वस्व समर्पित करना चाहता है, बिना किसी
प्रतिदान की आशा के।
           
  ―सुरेन्द्र कुमार कन्नौजी (नास्तिक उर्फ़ धर्ममुक्त)

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