अंधविश्वास, दुनिया के कोने-कोने में फैले हुए हैं। कभी-कभी तो उन्हें संस्कृति की धरोहर का एक हिस्सा मानकर अनमोल समझा जाता है। या फिर उनको महज़ जिज्ञासा की नज़र से देखा जाता है, और ज़िंदगी में रंग भरने के लिए ज़रूरी समझा जाता है। पश्चिमी देशों में अंधविश्वास को आम तौर पर गंभीरता से नहीं लिया जाता या उन पर पूरी तरह से यकीन नहीं किया जाता है। मगर अफ्रीका जैसे देशों में लोगों की ज़िंदगी पर अंधविश्वास की एक मज़बूत पकड़ है।
अफ्रीकी संस्कृति का अधिकतर हिस्सा अंधविश्वास की बुनियाद पर बना है। वहाँ की फिल्मों, रेडियो पर आनेवाले कार्यक्रम और साहित्यों में अकसर अंधविश्वास और जादू-टोना, पूर्वजों की उपासना और तावीज़ों जैसे अलौकिक विषयों पर ज़ोर दिया जाता है। लोगों पर अंधविश्वासों का इतना गहरा असर क्यों हैं, और इनकी शुरूआत कहाँ से हुई?
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