आस्तिक से नास्तिक तक का सफ़र......✍🏻
मेरे नास्तिक बने आज 4 वर्ष होने को है। पर 4 वर्ष पूर्व मैं जितना नास्तिक था उससे कहीं ज्यादा आज हूँ।
कई बार मैं नास्तिकता के सन्दर्भ में लिखने से डरता रहा। अत्यधिक मनुवादी और पाखंडियों ने मेरी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पैरा डालने की कोशिश की, मेरी आवाज तक को दबाने की भी प्रयास किया गया। पर मैं अपना नास्तिकता से परिपूर्ण भीड़मुक्त मार्ग में डटा रहा। मेरी नास्तिकता के शुरुवाती दौर में विभिन्न प्रकार के संघर्षों से झूझना पड़ा पर अब मेरा मार्ग और भी सहज और सरल हो गया। संविधान का अनुसरण करके मैं मानता हूँ की जब तक आपका दोष साबित नहीं हो जाता तब तक आप कभी दोषी नहीं हो सकते। शायद अब काल्पनिक ईश्वर नामक झूठ का अस्तित्व मिटने वाला है क्योंकि हम और आप जैसे नास्तिकों ने अब इस प्रतिस्पर्धा से परिपूर्ण दुनिया में पैंर पसार लिया है। अब लाख समस्या मेरे सामने खड़ी हो या कोई पुलिस का भय दिखाकर भयांकित करे, आतंकित करे, सुकरात की भांति जहर पीना पड़े या गौरी लंकेश की तरह गोली खाना पड़े मैं अपनी आवाज को कभी दबने नहीं दूँगा। अब मुझे नास्तिकता के इस सकारात्मक सोच और भीड़मुक्त मार्ग पर चलने से कोई रोक नहीं सकता।
- सुरेंद्र कुमार कन्नौजी
No comments:
Post a Comment